Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
प्रतिबिम्बेष्विवादर्शसमं साक्षिवदास्थितम् ।
नश्यत्सु न विनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
अध्यस्त हुए वधादि दोषों से आत्मा लिप्त नहीं होता, इसमें दूसरा दृष्टान्त बतलाते हैं।
प्रतिबिम्बों के सदृश नष्ट हो रहे पदार्थों में दर्पण-सदृश यानी प्रतिबिम्बों के नष्ट होने पर भी दर्पण
की नाई साक्षिस्वरूप से स्थित अविनाशी आत्मा को जो देखता है, वही सम्यग्दर्शी है