Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
यथोपलत्वं शैलानां दारुत्वं च महीरुहाम् ।
तरङ्गाणां जलत्वं च पदार्थानां तथात्मता ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार पर्वतं का पारमार्थिक स्वरूप पाषाणता ही है, वृक्षो का स्वरूप काष्ठता ही
है ओर तरगों का स्वरूप जलता ही है; उसी प्रकार सम्पूर्णं पदार्थो का पारमार्थिक स्वरूप आत्मता ही
है