Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
इति श्रुत्वाऽभयं त्वन्तर्भावयित्वा सुनिश्चितम् ।
जीवन्मुक्ताश्चरन्तीह सन्तः समरसाशयाः ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार के उपदेशों को सुनकर ओर निश्चयपूर्वक भीतर अभय ब्रह्म की भलीर्भोति भावनाकर
समचित्त महात्मा लोग जीवन्मुक्त होकर इस व्यवहार भूमि में विचरण करते हैं