Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
जडं देहादि दुःखादेर्यदिदं भोक्तृसंस्थितम् ।
तन्मायाभ्रममेवाङ्ग विद्ध्यबोधवशोत्थितम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रिय पार्थ, देह आदि दुःख
आदि के भोक्तारूप से जो यह चित्तादिघटित जडताप्रधान जीवरूप अवस्थित हे, उसे अज्ञानवश
उत्पन्न मायाभ्रम ही तुम जानो