Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
न किंचिदेव देहादि न च दुःखादि विद्यते ।
आत्मनो यत्पृथग्भूतं किं केनातोऽनुभूयते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः आत्मा से पृथक्भूत देह आदि कुछ भी नहीं हैं और न
दुःख आदि ही अपनी कुछ सत्ता रखते हैं, अतः कोन पदार्थ किसका अनुभव करेगा ? अर्थात् कोई
किसीका अनुभव नहीं करेगा