Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यदिदं कथयाम्यत्र तेनैवातो विनश्यति ।
भ्रान्तिर्दुःखमबोधोत्था सम्यग्बोधेन भारत ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भारत, चूँकि दृश्यमान यह दुःख ब्रह्म के अज्ञान से जनित
एक प्रकार की भ्रान्ति ही है, अतः तत्त्वज्ञान से वह नष्ट हो जाता है, इस विषय में मैं तुम्हे दृष्टान्त
बतलाता हूँ