Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यथा रज्ज्वामहिभयं बोधान्नश्यत्यबोधजम् ।
तथा देहादिदुःखादि बोधान्नश्यत्यबोधजम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार रज्जु के अज्ञान से उत्पन्न हुआ रज्जु में सर्पभय रज्जु के यथार्थज्ञान
से नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार आत्मा के अज्ञान से उत्पन्न हुए देह आदि एवं दुःखादि भय आत्मा
के तत्त्वज्ञान से नष्ट हो जाते हैं