Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विष्वग्विश्वमजं ब्रह्म न नश्यति न जायते ।
इति सत्यं परं विद्धि बोधः परम एष सः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
वह बोध किस प्रकार का है ? यह कहते हैं।
यह विश्व नित्य एवं पूर्ण ब्रह्मरूप ही है, वह न तो नष्ट होता है और न उत्पन्न ही होता है, यही
अकाट्य सत्य है, यह जानो ओर यही वह उत्तम बोध हे