Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
पुरुषाक्षौहिणीनां च क्षयेणानुभवात्मना ।
ब्रह्मणा बृहितं शुद्धं ब्रह्म ब्रह्ममयं कुरु ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्हारे द्वारा किया जानेवाला अक्षौहिणी सेना का विनाश
भी ब्रह्मरूप ही है, अतः क्षयात्मना भी ब्रह्म ही विस्तीर्ण है, इसलिए तुम अनुभवरूप शुद्ध ब्रह्म को
ही ब्रह्ममय कर दो