Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
जहि मानं मदं शोकं भयमीहां सुखासुखे ।
द्वैतमेतदसद्रूपमेकः सद्रूपवान्भव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
अर्जुन, तुम मान, मद, शोक, भय, इच्छा, सुख, दुःख - यह सम्पूर्ण असद्रूप द्वैतप्रपंच छोड़ दो और
एकमात्र अद्वितीय सद्रूप हो जाओ