Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
समः सौम्यः स्थिरः स्वस्थः शान्तः सवार्थनिस्पृहः ।
यस्तिष्ठति स सव्यग्रोऽप्यलमव्यग्रतां गतः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो सम, सौम्य, स्थिर,
स्वस्थ, शांत और सब पदार्थो से निस्पृह होकर अवस्थित रहता है, वह कर्मयुक्त होता हुआ भी
अकर्मता को प्राप्त होता हे