Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष, के सभी कर्म कामसंकल्प से वर्जित हैँ अतएव ज्ञानरूपी
अग्नि से दग्ध कर्मवाले उस पुरुष को सभी विद्वान पण्डित" कहते हैं