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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 54, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सत्त्वासत्त्वमती त्यक्त्वा चैतयोर्जगदात्मनोः । त्यक्त्वा न किंचिन्मध्ये च शेषे बद्धपदो भव ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत्‌ सत्य हे, ओर निरतिशय आनन्द- स्वरूप ब्रह्म असत्य है-इन बुद्धियों को छोड़कर तथा जगत्‌ एवं आत्मा के अन्तराल मेँ दोनों के संघटन में हेतुभूत मन ओर तम को, तुच्छत्व-बुद्धि से छोडकर जो चिदात्मा अवशिष्ट रहता हे, उसमें तुम प्रतिष्ठित हो जाओ