Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 55, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 55, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
देहनाशे महाबाहो न किंचिदपि नश्यति ।
आत्मनाशो हि नाशः स्यान्न चात्मा नश्यति ध्रुवः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महावाहो, देह का नाश
होने पर इसका कुछ भी नष्ट नहीं होता । आत्मा का नाश होने पर इसका कुछ नाश हो सकता है, किन्तु
अविनाशी आत्मा का नाश नहीं होता