Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 56, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 56, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

असत्सत्कुरुते क्षिप्रमितीयं भ्रान्तिरुत्थिता । क्षणेनैव मनोराज्यं प्रतिभातं स्वभावतः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

उसे ही कहते हैं। क्षणभर के लिए ही अज्ञानवश जो यह चित्र-विचित्रस्वरूप प्रतीत हुआ मनोराज्य है, वही दृश्यमान इस प्रपंच-जाल के रूप में स्थित है