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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 56, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 56, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

प्रतिभामात्रतोऽत्रैव कल्पिता वज्रसारता । प्रतिभासविपर्यासमात्रं ह्यविदिताकृतेः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

परन्तु वह ठीक नहीं है, यह कहते है। चूँकि यह जगत्‌ अज्ञाततत्त्व आत्मा का एकमात्र अन्यथा प्रतिभास ही है, इसलिए इस तरह के जगत्‌ के आरोप या वाध में भला कौन-सी वह दुरुच्छेदता है ? अर्थात्‌ कोई है ही नहीं