Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 57, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 57, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
सर्वं व्योमकृतं व्योम्ना व्योम्नि व्योम विलीयते ।
भुज्यते व्योमनि व्योम व्योम व्योमनि चाततम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाश द्वारा चिदाकाश में चिदाकाश ही विस्तृत हुआ हे