Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
स्थितिर्देहमयो ज्ञानविभ्रमो लयमेति च ।
देहदेहवतोर्ज्ञानाद्यथाभूतार्थयोः स्थितिः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अन्धकार और प्रदीप पदार्थ की नाई परस्पर उत्थान स्वभाववाले देह ओर देहाधिष्ठान
आत्मा इन दो निकृष्ट ओर परमार्थरूप पदार्थो का वास्तवस्वरूप जान लेने पर देह की असत्तात्मिका
ओर उसके साक्षी आत्मा की सत्तात्मिका स्थिति प्रकट हो जाती है