Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
सत्तासत्तात्मिकोदेति दीपाद्दीपपदार्थयोः ।
असम्यग्दर्शिनो देहस्यावर्तपरिवर्तनैः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
अब अज्ञानी के जगत-दर्शन-पद्धति की निन्दा करने के लिए कहते है ।
जिस पुरुष को आत्मा का साक्षात्कार नहीं हुआ है, उस पुरुष को देह के आविर्भाव ओर तिरोभाव
के द्वारा निरवधि (असंख्य) वे मोहरूपी अर्जुनवृक्ष प्रस्फुरित होते ही रहते हैं