Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
मूर्खार्थमेव विकसत्यङ्गना विषवल्लरी ।
अज्ञस्य हृदि सद्भूमावेव पेलवपल्लवा ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानी पुरुष के मनरूपी उर्वराभूमि में ही विरल पल्लवो से युक्त अनर्थ हेतु पापादिरूप
पक्षियों की छायाभूत रागरूपी दुष्ट वृक्ष उत्पन्न होता रहता हे