Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
परिपालयति प्रीता मयूरी वारिदं यथा ।
नेत्रलोलालिनीलोला स्फुरिताधरपल्लवा ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
चपल नेत्ररूपी भ्रमरियों से युक्त
प्रस्फुरित अधररूपी पल्लवोंवाली अंगनारूपी विषलता केवल मूर्खो के लिए ही विकसित होती
हे