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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

अज्ञस्याशाः प्रसूयन्ते सुकृष्टादिव शालयः । नरकश्रीरिहाज्ञानं दुष्कृतव्यालवेष्टितम् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, पापरूपी सर्पो से वेष्टित अज्ञानी पुरुष की नरकरूपी लक्ष्मी उस प्रकार यहाँ प्रतीक्षा करती है, जिस प्रकार मयूरी मेघ की प्रतीक्षा करती है