Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
जडमेव समभ्येति पुनर्मरणवाडवः ।
जन्म बाल्यं व्रजत्येतद्यौवनं युवता जराम् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
जन्म आदि भी उत्तरोत्तर अनर्थो की ही प्राप्ति कराते हैं, ऐसा कहते हैं।
अज्ञ पुरुष का ही जन्म पुनः-पुनः बालपन प्राप्त करता रहता हे, बालपन बारबार यौवन प्राप्त
करता रहता है, यौवन बारबार वार्धक्य प्राप्त करता रहता है और वार्धक्य बारबार मरण प्राप्त करता
रहता है