Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
फलानि पुण्यपापानि मञ्जर्यो विभवश्रियः ।
अज्ञानेन्दूदये नैता योषिदोषधयः स्फुटम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानरूपी चन्द्रमा के उदय से ही इस संसारूपी अरण्य के भाग
में स्त्रीरूपी लताएँ विस्पष्टरूप से उत्तम शोभा प्राप्त कर रहीं हैं