Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
विचित्ररचनोपेता भूरिभोगिविहङ्गमाः ।
यत्र जन्मानि पर्णानि कर्मजालं च कोरकम् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस
कल्पवृक्ष पर जन्म ही पल्लव हैं, कर्मो का समूह ही कलिका है, पुण्य-पाप ही फल हैं और विभव
सम्पत्तियाँ ही मंजरियाँ हें