Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
अज्ञानात्प्रसृता यस्माज्जगत्पर्णपरम्पराः ।
यस्मिंस्तिष्ठन्ति राजन्ते विशन्ति विलसन्ति च ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कल्पवृक्ष पर चित्र-विचित्र रचनाओं से
युक्त भोगो मे अत्यन्त आसक्त पक्षी रहते, प्रकाशते, प्रविष्ट होते ओर विलास करते हैं