Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 6, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
मोहात्संलक्ष्यते चित्रपदार्थानन्तरञ्जनः ।
जयत्यनल्पसंकल्पकल्पनाकल्पपादपः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
असीम संकल्प-कल्पनारूपी कल्पवृक्ष सबसे बढ़कर है, क्योकि
अत्यन्त असत् भी पदार्थो से सम्पूर्ण कामनाओं की पूर्ति- सामर्थ्य वह रखता है, अज्ञानवश उसीसे
जगत-रूपी पत्तों की परम्परा विस्तृत हुई है