Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 61, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
सर्गाख्यः सर्वभूतानां प्रत्येकमुदितस्तथा ।
चित्तत्त्वस्यैव भावेन सर्गवर्गपरम्परा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी प्रसिद्धि चिति के ही अधीन है, ऐसा दृृश्यत्व मिथ्यात्व में ही प्रयोजक है, वह दृश्यत्व हम
लोगों की स्वाप्निक सृष्टि तथा हिरण्यगर्भ की स्वाप्निक सृष्टि मे समानहै।
जिस प्रकार द्रवत्व के कारण आवर्तरूप परिवर्तनं से जल प्रस्फुरित होता है, उसी प्रकार चितितत्त्व
के अस्तित्व से यह सृष्टि की परंपरा प्रस्फुरित होती हे