Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 61, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यत्स्वप्नपुरुषाज्जातं तत्स्वप्नपुरुषात्मकम् ।
भवतीत्यनुभूतं हि यद्बीजं तत्फलं यथा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
माना कि प्रजापति का समष्टि स्वप्न भी वैसा ही है, उससे प्रकृत मेँ क्या आया ? इस पर कहते हैं ।
जो स्वाप्निक पुरुष से उत्पन्न हुआ है, वह उसी प्रकार स्वप्नपुरुषरूप है, जिस प्रकार आम के
बीज से उत्पन्न हुआ आम का फल आग्रवीजरूप ही है, कोई दूसरा नहीं, वैसे ही स्वप्नपुरुष से उत्पन्न
हुआ जीव-जगद्रूप संसार भी स्वप्नपुरुषरूप ही है, दूसरा नहीं