Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 63, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 63, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
चमत्कृतिश्चेतसि या रूढा सैव विजृम्भते ।
वल्ली त्यजति नैदाघी पीतमप्यम्बु माधवम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
क्योकि पीछे जो चमत्कृति चित्त में आरूढ होती है, वही
पूर्व चमत्कृति को दबाकर विलसित होती है । (किस प्रकार दबाकर विलसित होती है, इसमें दृष्टान्त
देते हैँ "वल्ली" से।) उष्णता-चमत्कार से व्याप्त लता वसन्तकालीन पीये हुए भी जल को यानी हरेपन
के चमत्कार को छोड देती है अर्थात् उसे दबाकर विलसित होती है