Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 64, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 64, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
परमभ्यासयोगाभ्यां विना त्वेतन्न लभ्यते ।
येषां तु योगविज्ञानदृष्टयः फलिताः स्थिताः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तम अभ्यास के बिना भी अपने-आप ही योगसिद्धि का फल प्राप्त है यो विशेष बतलाते है।
हरि, हर आदि ईश्वरो को जिनकी योगविज्ञानदृष्टियाँ (समाधि ओर अध्यात्मशास्त्रज्ञान से जनित
दृष्टियाँ) फलित होकर स्वयं ही स्थित हैं वे ये शंकर आदि, सब वस्तु को सर्वत्र देखते-रहते हैं