Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 64, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 64, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तदिच्छयाशु तद्रूपा बहुरूपाश्च ते इह ।
इह विद्याधरोऽहं स्यामहं स्यामिह पण्डितः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उन सवो के अपने-अपने संसारद्शन में तो उनकी इच्छा ही कारण है।
यहाँ मैं यह विद्याधर हो जाऊँ, यहाँ मे पण्डित हो जाऊँ, इस प्रकार की इच्छा ही उनके तत्-तत्
रूप हो जाने में कारण है