Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 65, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 65, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
त्वया संभवतीत्युक्तं यथा तच्चानुभूयते ।
एवंगुणविशिष्टात्मा तन्मोहात्मा स भिक्षुकः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार उपदिष्ट अर्थके अभिनन्दन से गुरु महाराज को सन्तोष देकर “आपने मुझे बोध देने के
लिए जिस भिक्षुक के विषय में कहा“ वह भिक्षुक क्या कल्पित है या वास्तव में कहीं है भी ? इस प्रकार
के सन्देह द्वारा कौतुकपूर्वक पूछते हैं।
महाराज, इस प्रकार के गुणों से युक्त तथा जीवटादि का मोहभूत वह भिक्षु कहीं है या नहीं ? इस
विषय में हृदय के अन्दर विचारकर मुझसे कहिये