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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 65, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 65, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अहो नु खलु वैषम्यं भीमं निजवदुच्यते । भगवन्सर्वदा सर्वं सर्वदैव जगत्स्थितौ ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

सर्वत्र सब कुछ सदा संभव है, यह मेरे मन में आ गया, ऐसा कहते हैं। भगवन्‌, जैसा आपने कहा कि इस जगत्स्थिति में सदा सर्वत्र सब कुछ संभव है, ठीक वैसा ही मैं भी अनुभव करता हूँ