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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 67, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 67, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

दशरथ उवाच । मुनिनायक तं भिक्षुं गत्वा संबोधयन्त्वमी । नरा मत्प्रहिताः शीघ्रं चानयन्तु कुटीगतम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा दशरथजी ने कहा : हे मुनिनायक, आप आज्ञा दीजिए, जिससे कि मेरे भेजे हुए ये मन्त्री आदि जन कुटी में स्थित भिक्षु के पास जाकर समाधि से उसे जगावें और यहाँ लावें

सर्ग सन्दर्भ

छासठवाँ सर्ग समाप्त सड़सठवाँ सर्ग समाधि में स्थित भिक्षु का देहनाश ओर भिक्षुभ्रम के सदृश दूसरे जीवों को बन्धप्राप्ति और तत्त्वज्ञान से बन्ध की निवृत्ति-यह वर्णन ।