Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verses 16–17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 69, verses 16–17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 16,17

संस्कृत श्लोक

विदेहमुक्तविषयं तुर्यमौनमतो मया । नोक्तं तव परं मौनं सदेहस्य रघूद्वह ॥ १६ ॥ खादप्यतितरामच्छमात्माकाशं चिदात्मकम् । तत्ताप्राप्तिः परं श्रेयः सा कथं प्राप्यते श्रृणु ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह प्रश्न का समाधान देकर प्रस्तुत मौन के विषय में अवशिष्ट वक्तव्य दिखलाते हैं। हे रघूद्रह, प्रसिद्ध चार प्रकार के मौनों से परे जो तुर्य मौन है, वह विदेहमुक्तों का विषय है और आप हैँ सदेह, इसलिए आपसे वह मेने नहीं कहा । अब कहता हूँ, सुनिये । भद्र, आकाश से भी अत्यन्त स्वच्छ चित्स्वरूप आत्माकाश है ओर उस आत्माकाशभाव की प्राप्ति ही परम श्रेय (मोक्ष) हे । वह कैसे प्राप्त की जाती हे, (यह मैं बतलाता हूँ, आप) सुनिये