Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 69, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
मनोभवस्तु संसारः क्व ममाहं क्व संततिः ।
उपदेश्योपदेशादिबन्धमोक्षौ च तत्कुतः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान से मन का नाश होने पर उसके कार्य अहन्ता, ममता आदि बन्धन से लेकर मोक्षपर्यन्त सब
कल्पनाएँ बाधित हो जाती है यह कहते है।
यह संसार मन से उत्पन्न हुआ हे । ज्ञान से मन का नाश हो जानेपर उसके कार्य ममता, अहन्ता,
संसृति, उपदेश्य, उपदेशादि, बन्ध ओर मोक्ष कहाँ किससे उत्पन्न हो सकते हैं