Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 69, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 58

संस्कृत श्लोक

यदि सांख्येन विश्रान्तं चेतो योगेन वापि ते । क्षणं तत्सत्त्वतां यातं न भूय इह जायते ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

यही प्रस्तुत साख्य ओर योग का अभिन्न फल है, यह कहते हैं। हे रामभद्र, यदि आपका चित्त सांख्योपाय से या योगोपाय से क्षणमात्र भी परमपद में विश्रान्त हो चुका है तो वह सत्त्वरूप बन गया है; फिर वह इस संसार में आनेवाला नहीं हे