Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 69, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 69, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सर्वात्मनः सर्वगत्वाद्यद्यथा यत्र भाव्यते ।
तथानुभूयते तत्र तत्तथा ज्ञतया धिया ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वात्मस्वरूपता के बल से भी उन्हे सर्वविध अर्थो की सिद्धि होती है, यह कहते हैं।
सर्वात्मस्वरूप आत्मा के सर्वगामी होने से जिस वस्तु की जहाँ-कहीं जैसे भावना की जाती है,
उसकी वहीं पर वैसे ही जीवन्मुक्तता बुद्धि से अनुभव किया जाता है