Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
दुःखशोकमहाष्ठीलः कष्टकण्टकसंकटः ।
सहस्रशाखतां याति दारिद्र्यदृढशाल्मलिः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
दुःख ओर शोकरूपी महान ग्रन्थियों
से युक्त, कष्टरूपी कण्टको से आकीर्णं ददिद्रतारूपी दृढ शाल्मली वृक्ष जो हजारों शाखा-
प्रशाखारूपता को प्राप्त होता है, वह भी अज्ञान का विलास है