Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
आभासपुष्पधवला जगत्पल्लवशालिनी ।
सत्तालता विकसिता धर्मार्थफलधारिणी ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाभास-प्रकाशरूपी पुष्पों से उज्जवल, व्यावहारिक सत्यतारूपी लता, जिसमें जगतरूपी पल्लव
हैं और जो धर्म, अर्थरूपी फल धारण करती है एवं विकसित होती है, यह भी अज्ञान का विलास
है