Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
सुराचलमहास्थूणं चन्द्रसूर्यगवाक्षकम् ।
गगनाच्छादनं चारु ध्रियते त्रिजगद्गृहम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें बड़े-बड़े पर्वत ही स्तम्भ हैं, सूर्य, चन्द्र ही झरोखे हैं, गगन ही छपरा या छत है,
ऐसा जगत-त्रयरूपी घर जो स्थिति को प्राप्त होता है, वह भी अज्ञान का विलास हे