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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

उद्यानवनखण्डेषु भूमौ कृतमदा मधौ । हृद्याः सुमनसो भान्ति दासा इव मनोभुवः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

वसन्तकाल में वनखण्डों में, वृक्षों में और भूमि में कामदेव के अनुचर की नाई कामियों को मद उत्पन्न करनेवाले जो सुन्दर पुष्प दिखाई पडते हैं, वह भी अज्ञान का विलास हे