Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
क्रव्यादगृध्रगोमायुकौलेयकवलाङ्गिकाः ।
स्त्रियः समुपमीयन्ते चन्द्रचन्दनपङ्कजैः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
कच्चे मांस का भक्षण करनेवाले गीध, गीदड, कुत्ता आदि के कवल के (कौर के) योग्य अंगोवाली
सित्रियो की चन्द्र, चन्दन और कमल के साथ उपमा दी जाती है, वह भी अज्ञान का ही विलास है