Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
भूरिभूतशराबाणि क्षणभङ्गानि कुर्वता ।
इदं कालकुलालेन चक्रं संपरिवर्त्यते ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षणभर में विनष्ट हो जानेवाले अनेक भूतरूपी सकोरों का निर्माण कर रहा कालरूपी
कुम्हार इस संसारचक्र का जो परिवर्तन करता है, वह भी अविद्या का विलास है