Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
भूतमौक्तिकसंपूर्णान्बृहतः सुबहूनपि ।
जगत्कलभकानत्ति कृतान्तोद्रिक्तकेसरी ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राणीरूपी गजमुक्ताओं
से शोभित, अनन्त जगतरूपी बड़े-बड़े उन्मत्त गजों का कृतान्तरूपी (कालरूपी) प्रचण्ड सिंह जो
भक्षण कर डालता हे, वह भी अविद्या का प्रभाव हे