Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
कालमेघे स्फुरन्त्येताश्चित्प्रकाशवनोद्यमाः ।
प्रपतद्भूतविहगाः पतन्त्यविरतभ्रमाः ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
अति उन्नत
कालरूपी तालवृक्ष से ब्रह्माण्डरूपी फल की पंक्तियाँ, जिनके लिए प्राणीरूपी कोए उडते ओर निरन्तर
चक्कर काटते रहते हे, गिर रही हे, वह भी अविद्या-प्रभाव हे