Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
कालतालात्किलोत्तालाद्ब्रह्माण्डफलपालयः ।
उन्मेषकृतवैरिञ्चसृष्टयो देवनायकाः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, इसी ब्रह्मचैतन्य में निमेषमात्र मे ब्राह्मी सृष्टि पैदा करनेवाले तथा क्षणमात्र मे उसका
संहार करनेवाले देवताओं के नियामक ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वररूपी कई जो देवाधिपति हैं, वह भी
अज्ञान का प्रताप है