Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
निमेषकृतसंहाराः सन्ति केचन कुत्रचित् ।
निमेषोन्मेषसंक्षीणकल्पजालाः सहस्रशः ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
हजारों बार निमेष के उन्मेषमात्र काल में जिन्होंने कल्पों के समूह नष्ट-
भ्रष्ट कर दिये हैं, ऐसे कुछ रुद्र जो उस परमचित् में हैं, वह भी अज्ञान का विलास है