Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 64

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 64

संस्कृत श्लोक

रुद्राः केचन विद्यन्ते तस्मिंश्चित्परमे पुनः । तेऽपि यस्य निमेषेण भवन्ति न भवन्ति च ॥ ६४ ॥

हिन्दी अर्थ

वे देवनायक भी जिसके निमेष से उत्पन्न होते हैं ओर विनष्ट होते हैं, ऐसा भी कोई देवाधिदेव है, क्योंकि यह रुद्रपर्यन्त क्रियाओं की स्थिति यानी कर्म, उपासना ओर फलभाव की स्थिति अनन्त हे । यह भी अविद्या-प्रभाव हे